TOP 10 SAD SHAYARI

TOP 10 SAD SHAYARI...........

top 10 sad shayari
1  दर्द सुनाया करता है ...

काग़ज़ काग़ज़ हर्फ़ और करता है,
तन्हाई में शहर बसाया करता है,
कैसा पागल शख्स है सब-रात,
दीवारों को दर्द सुनाया करता है,
रो देता है आप ही अपनी बातों पर,
और फिर खुद को आपको हंसाया करता है

2 तुम्हारा प्यार करने का अवसर ...

मेरे दिल ने जब भी दुआ माँगी है,
तुझे माँगा है तेरी वफ़ा माँगी है,
जिस मोहब्बत को देख के दुनिया को रश्क आये,
तुम्हारा प्यार करने की वो अदा माँगी है।

3 सर्द रातों में जुदाई ...

सर्द रातों में सताती है जुदाई तेरी,
आग बुझती नहीं सीने में लगाई तेरी,
तू तो कहता था बिछड़ के सुकून पा लेगा,
फिर क्यों रोती मेरे पास पे तन्हाई तेरी है।



4 एक बार पुकारेगी तुम्हें ...

तुम सुनो या न सुनो, हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ,
डूबते-डूबते एक बार पुकारेंगे तुम्हें।

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मेरे होने में किसी से शामिल हो जाओ,
तुम मसीहा नहीं होते हो तो क़ातिल हो जाओ।

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ज़मीं छूटी तो भटक ​​जाओगे ख़लाओं में,
आप उड़ते उड़ते कहीं आसमाँ न छू लेना।

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बड़ा घोण है, चराग़ों का क्या ख़याल करूँ,
अब इस ओर कोई मौजे-हवा निकल आये।

5 ज़ख्मों की बहार ...

आप जो दिल के अँधेरे में जलाया था कभी,
उसने दिया आज भी सीने में जला रखा है,
देख आ कर दहकते हुए ज़ख्मों की बहार,
मैंने अब तक तु गुलशन को सजा दी है।

6 अगर कोई तोड़ दे दिल ...

किसी का हाथ थाम के छोड़ना नहीं,
वादा किसी से कर के तोड़ना नहीं,
कोई अगर तोड़ दे दिल तुम्हारा तो,
बिना हाथ पैर तोड़े उसे छोड़ना नहीं।

7 मजनू लँगड़ा हो गया ...

लला की शादी में एक लफ़ड़ा हो गया,
मजनू इतना नाचा कि लँगड़ा हो गया है।

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न तू छत पे आता है न मैं दीवाना होता है,
न तू पत्थर मारती न मैं काना होता है।

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जिनको हम चुनते हैं, वे ही हमें धुनते हैं,
चाहे बीवी हो या नेता, दोनों कहाँ सुनते हैं !!

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यारो मेरे मरने के बाद आँसू मत बहाना,
ज्यादा याद आया तो उपर ही चले आना।



8 बेवफाई कई है ...

दिल के दरिया में धड़कन की कश्ती है,
ख़्वाबों की दुनिया में यादों की बस्ती है,
मोहब्बत के बाजार में चाहत का प्रतिनिधि है,
वफ़ा की कीमत से तो बेवफाई सस्ता है।



9 दुआ सलाम न हो ...

अगर ये ज़िद है कि मुझे दुआ सलाम न हो,
तो ऐसे राह से गुज़रो जो राह-ए-आम न हो।

सुना है कि मोहब्बत पे लोग मरते हैं,
ख़ुदा करे कि मोहब्बत तुम्हारा नाम न हो।

बहार-ए-आरिज़-ए-गुल्गू तुझे ख़ुदा की क़सम,
वो मेरे लिए भी वही हैं जिसकी शाम न हो।

मेरे सुकूत को नफ़रत से देखने वाले,
यही सुकूत कहीं बाइस-ए-कलाम न हो।

इलाही ख़ैर कि उन का सलाम आया है,
यही सलाम कहीं न कहीं अरेरी सलाम न हो।

जमील उन से तआरूफ़ तो हो गए लेकिन,
अब उनके बाद किसी से दुआ सलाम न हो।



10 मेरा जी नहीं लगता ...

नज़र नवाज़ नजारों में जी नहीं लगता है,
फ़िज़ा गया तो बहारों में जी नहीं लगता,
न पूछ मुझसे और ग़म में क्या गुजरती है,
यह कह रही है कि हजारों में जी नहीं लगेगा।

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